Saturday, March 19, 2011

डॉ. राजीव दीक्षितः असमय शांत हो गई एक ओजस्वी वाणी

ऐसा कम ही होता है कि लोगों की जन्म तिथि और पुण्यतिथि एक हो। क्योंकि जिन लोगों का जन्म और देहांत एक ही दिन होता है वे महान आत्माएं होती हैं। ऐसी ही एक महान आत्मा हमारे बीच नहीं रही। जिसने अपनी तेजस्वी वाणी से भारत के कोने-कोने में स्वदेशी की अलख जगाई और अपने वाक कौशल से लोगों को अंदर तक झकझोर दिया, ऐसे डॉ. राजीव दीक्षित असमय काल का शिकार हो गए। ३० नवंबर १९६७ को उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ जिले के अतरौली तहसील में जन्में राजीव दीक्षित ने ३० नवंबर २०१० को अचानक हार्ट अटैक हो जाने से छत्तीसगढ के भिलाई में अंतिम सांस ली। उस समय वे भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के तत्वाधान में आयोजित भारत स्वाभिमान यात्रा पर थे।

स्वदेशी के प्रखर वक्ता और बाबा रामदेव के मार्गदर्शन में स्थापित भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे राजीव दीक्षित की शुरुआती शिक्षा ग्रामीण परिवेश में हुई। राधेश्याम दीक्षित के घर में जन्में डॉ. राजीव का शुरुआती जीवन वर्धा में व्यतीत हुआ। बेहद सरल और संयमी जीवन जीने वाले राजीव दीक्षित निरंतर साधना में लगे रहते थे। पिछले कुछ महीनों से वे लगातार गांव-गांव व शहर-शहर घूमकर भारत के उत्थान के लिए भ्रष्टाचार और स्वदेशी जैसे मुद्‌दों पर लोगों के बीच जनजाग्रति पैदा कर रहे थे। राजीव भाई वैज्ञानिक भी रहे उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी काम किया और फ्रांस के टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर के अलावा भारत के सीएसआईआर में भी काम किया था।
 
राजीव दीक्षित पिछले २० सालों से बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बहुराष्ट्रीय उपनिवेशवाद के खिलाफ व स्वदेशी की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे। वे मानते थे कि भारत पुनर्गुलामी की ओर बढ़ रहा है और इसे रोकना बहुत जरूरी है। उनकी प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा फिरोजाबाद में हुई। फिर वे १९९४ में उच्च शिक्षा के लिए इलाहबाद चले गए। वे सेटेलाइट कम्युनिकेशन में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन अपनी शिक्षा बीच में ही छोड कर वे देश को विदेशी कंपनियों की लूट से मुक्त करने के लिए स्वदेशी आंदोलन में कूद पड े। शुरू में वे भगतसिंह, उधमसिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों से प्रभावित रहे। बाद में जब उन्होंने गांधी जी को पढ ा तो उनसे भी काफी प्रभावित हुए।


पिछले २० सालों में राजीव दीक्षित ने जो कुछ भी सीखा उसके बारे में लोगों को जागृत किया। भारतीय जनमानस में स्वाभिमान जगाने के लिए उन्होंने लगातार व्याखयान दिए। २० सालों में राजीव भाई ने तकरीबन १५ हजार से अधिक व्याखयान दिए। जिनमें से कुछ व्याखयानों की ऑडियो और वीडियो सीडी भी बनाई गईं। उनके व्याखयानों की सीडी लोगों के बीच खासी लोकप्रिय हैं। उन्होंने सबसे पहले देश में स्वदेशी और विदेशी कंपनियों की सूची तैयार की और लोगों से स्वदेशी अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने पेप्सी और कोक जैसे पेय पदार्थों के खिलाफ आंदोलन चलाया और कानूनी कार्यवाही भी की। पिछले १० सालों से स्वामी रामदेव के साथ संपर्क में रहने के बाद ९ जनवरी २००९ को उन्होंने भारत स्वाभिमान की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।
 
जब राजीव दीक्षित मंच से बोलते थे, तो सुनने वाले एकटक उनकी ओर देखते हुए उन्हें सुनते रह जाते थे। उनके भाषण में ऐसा सम्मोहन था कि बीच से उठकर जाना कठिन था। आवाज में ऐसा आकर्षण था कि कोई कहीं भी सुने तो खिंचा चला आए। ठोस तथ्यों के साथ वो अपनी बात को इतनी मजबूती और सहज ढंग से रख देते थे कि समझने के लिए दिमाग पर जोर डालने की जरूरत नहीं पड़ती। देश की कठिन से कठिन समस्या पर उन्होंने बेहद सरलता के साथ निदान दिए। कम ही लोगों को समझ आने वाला अर्थशास्त्र भी वे बेहद सरलता के साथ लोगों को समझा देते थे। यही कारण था कि लोगों को उनके रूप में देश का कर्णधार नजर आने लगा था। लेकिन ३० नवंबर २०१० को लोगों की इन उम्मीदों पर उस समय पानी फिर गया जब अचानक आए हार्ट अटैक ने डॉ. राजीव दीक्षित को हमसे छीन लिया। 

4 comments:

  1. As usual I was watching 'Astha Channel'live.When I heard the shocking news of Rajiv Bhai's death
    from Baba Ram Dev I was stunned.O my God! what an unpleasing episode in the way of right going men!!
    On that very moment I did not weep but cried like
    a mad.But all of sudden I saw the departing soul
    saying Don't be dishearten,it is another proof of what I had promissed. Did 'nt you read "Fansi Se Poorv", for which I had persisted it's author Bachchan Singh to write this noble?
    Dr.Krant M.L.Verma E-55,Beta-1,Greater Noida.

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  2. this is unbelieveable truth.But i think that was a murder because jo baba ram dev ke sharan me ho rojana yog karta ho usko heart attack hona ajib lagta hai.

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  3. शहीद राजीव भाई के सपनों को साकार करने के लिए वा उनके द्वारा शिरु किए गए कार्यो को पूर्ण रूप देने के लिए राजीव भाई द्वारा गठित "स्वदेशी भारत पीठम "से जुड़िये : आर्य जितेंद्र -09752089820
    https://www.facebook.com/deshibharat
    jitendra.prahri85@gmail.com

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