Wednesday, December 24, 2014

मोदी सरकार पर अपनों का वार!

अभी तक तो संघ परिवार से जुड़े संगठन ही अपनी कारस्तानियों से मोदी सरकारी की मुसीबतें बढ़ा रहे थे, लेकिन सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा कोलकाता में दिए बयान ने आग में घी का काम कर दिया। सरकार बने बमुश्किल छह महीने हुए हैं, राज्यसभा में बहुमत नहीं है, देश के सामने आर्थिक चुनौतियां हैं, आतंकवाद मुंह फैलाए देश को धमका रहा है, सीमाओं पर तनाव है, आम आदमी भ्रष्टाचार से त्रस्त है और कुछ संगठन बेमौसम के मुद्दे उछालकर मोदी सरकार के लिए रोज नई परेशानी पैदा कर रहा है।  

पिछले दस सालों में देश का मनोबल अपने न्यूनतम स्तर पर था, लोग ये कहने को मजबूर थे कि सबकुछ बदल सकता है, लेकिन भारत नहीं बदल सकता। ऐसे में 2014 चुनाव में मोदी के नेतृत्व में भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत के बाद देश की मनोदशा में बहुत तेजी से सुधार देखने को मिला। विश्व पटल पर भारत की नई छवि उभरी, अर्थव्यवस्था में सुधार दिखने लगा, महंगाई भी काफी हद तक औकात में आई, आम जनमानस की विचारधारा में एक आत्मविश्वास दिखने लगा, विपक्ष एक तरह से मुद्दा विहीन नजर आने लगाा, तब संघ परिवार से जुड़े संगठनों के क्रियाकलापों ने विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा दे दिया और अपनी ही सरकार को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया। नतीजा ये निकला कि शीतसत्र में राज्यसभा में न के बराबर काम हुआ है। देसी मीडिया ही नहीं विदेशी मीडिया भी हिंदू संगठनों के बयानों को बढ़चढ़कर उछाल रहा है, जिससे भारत की भी छवि खराब कर रही है।

मोदी जिस विजन के साथ देश के समक्ष खड़े एक-एक मुद्दे से दो-दो हाथ कर रहे हैं, उसको देखकर लगने लगा कि अब जल्द ही चीजें ऐसा मूर्तरूप लेती दिखेंगी जो देश को मजबूत बनाने वाली साबित होंगी। केंद्र सरकार द्वारा एक के बाद एक धड़ाधड़ उठाए गए सुधारात्मक कदमों से विपक्ष एक तरह से बौना दिखा। ऐसे अच्छे-खासे माहौल को कुछ संगठनों की नादानी भरी हरकतों ने जबरदस्ती खराब कर दिया। खबरें यहां तक आने लगीं कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन बयानों से तंग आकर पद छोड़ने की धमकी दी है। ये घटनाएं एनडीए की पिछली सरकार की याद ताजा करती हैं। उन दिनों शब्दों की तीर वाजपेयी के सीने में लगते थे। मजेदार बात ये है कि संघ से जुड़े ये हिंदूवादी संगठन अपनी ही सरकार में मुखर और आक्रामक होते हैं, जबकि अन्य पार्टियों के राज में ये सुसुप्त अवस्था में काम करते हैं।

दरअसल हमारे देश की व्यवस्था और संस्कृति दोनों ही ऐसी हैं कि प्रधानमंत्री के पद पर बैठकर आप भेदनीति के साथ काम नहीं कर सकते। पद पर आसीन होने के बाद आपको राजधर्म का पालन हर हाल में करना है और भारत के पुरातन ग्रंथों ने इस राजधर्म की व्यवस्था उस समय दे दी थी जब लोकतंत्र के मां-बाप भी गर्भ में नहीं आए होंगे। आज अगर नरेंद्र मोदी सरकार उसी राजधर्म का पालन करते हुए देश को एक नई दिशा प्रदान करने की कोशिश कर रही है तो उसमें हर्ज क्या है?

ये बात सही है कि भारत अगर आज सेकुलर देश है तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि यहां 80 फीसदी से ज्यादा आबादी हिंदुओं की है, जिसकी मूल संस्कृति में ही सहिष्णुता भरी हुई है। हां, अगर आज भारत में हिंदू धर्म के बजाय कोई दूसरा धर्म बहुसंख्यक होता तो ये बात दावे के साथ कही जा सकती है कि भारत एक सेकुलर देश कभी नहीं होता। विश्व का कोई देश ऐसा नहीं है जहां बहुसंख्यक आबादी की इस तरह से अनदेखी की जाती रही हो जैसी भारत में होती है। अमेरिका जैसे तथाकथित विकसित और सबसे पुराने लोकतंत्र का राष्ट्रपति भी बाइबिल पर हाथ रखकर पद की शपथ लेता है, जबकि भारत में अगर कोई गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की भी मांग करे तो हो-हल्ला मच जाता है। ये हिंदू संस्कृति ही है जिसने हर धर्म को अपने यहां पनाह दी, क्योंकि यहां की मूल संस्कृति ही वसुधैव कुटुम्बकम की बात करती है। हिंदू सबको अपने परिवार का हिस्सा मानता ही नहीं, वह सबको अपनाने की क्षमता रखता है, यहां तक कि पेड़-पौधों, नदियों-पहाड़ों और पशुओं के साथ भी हमने रिश्ता जोड़ा हुआ है। अपने इसी स्वभाव के कारण हिंदुओं को कई स्तरों पर भारी नुकसान भी उठाना पड़ा। नुकसान यहां तक हुआ कि अपने ही देश में हिंदू होना, हिंदू हित की बात करना, शर्म की बात हो गई। अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की ओछी राजनीति ने न केवल हिंदू हितों की अनदेखी बल्कि अल्पसंख्यकों के वोटों का भी जमकर दोहन किया। 

पर तमाम विपरीत परिस्थितियों को पार करते हुए आज हिंदू अपनी शक्ति को पहचानने लगा है या कहें कि हिंदू जागने लगा है। और इस जागरण में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का बहुत बड़ा योगदान है, संघ परिवार के अथक प्रयासों के बिना यह संभव ही नहीं था। देश को एक मजबूत सरकार का मिलना हिंदुओं की एकजुटता की ही देन है और गैरजरूरी बयानबाजी उसी सरकार को कमजोर बनाने का काम कर रही है। देश को नई दिशा देने का जो प्रयास किया जा रहा है उन प्रयासों को पटरी से उतारने में इस तरह के बयान मददगार साबित होंगे।

1 comment:

  1. मोदी सरकार को मारेंगे तो ये अपने ही मारेंगे ,औरों में अभी इतनी कुब्बत नहीं है और अपने ये काबू में आने वाले नहीं है। भा पा सरकारों के साथ अक्सर यही होता रहा है भा ज पा ने प्रांतों में अपनी सरकारें इसी कारण से खोयी हैं इसलिए कहा भी जाता है कि भा ज पा अच्छा विपक्षी दल है सत्ता में आ कर इसके नेताओं व समर्थकों में पागलपन आ जाता है ,ये रोटी को तवे से उतार सीधे मुहं में ही रखना चाहते हैं ,मोदी संभल कर बचा कर निकाल ले जाएँ यह बड़ी उपलब्धि होगी ,वरना अपनों से, अपनों के कारण दूसरों से लड़ते समय निकल जायेगा व देश उम्मीदों से ही बंधा रह जायेगा

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